हुनर और किस्मत
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हुनर और किस्मत
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
एक हुनर थी, एक थी किस्मत, किस्मत बड़ी, हुनर छोटी थी, हुनर सड़क पर करे तमाशा किस्मत महलों में सोती थी।
लेखक : Anju sahu
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