डाकिया के दर्द

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डाकिया के दर्द


"अपनों की चिट्ठी का इंतज़ार करते-करते जब उम्मीदें धुंधली पड़ गईं, तब उसने औरों के संदेश अपना लिए। अपने हिस्से का प्यार न मिला, तो दूसरों की खुशियों में खुद को बसा लिया। अब हर लिफ़ाफ़ा उसकी तक़दीर, हर दस्तक उसकी पहचान है। वो सिर्फ़ एक डाकिया नहीं, बल्कि अनकहे जज़्बातों का पैगाम बन गया है।"
: Erica

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