डाकिया
डाक डाकिया लाता था,
खबरें ले कर आता था।
खूब खबरें अच्छी होती थीं,
खुशियों के दीप जलाती थी।
कभी लगती थी किसी की नौकरी,
कभी किसी का ब्याह तय हो जाता था।
मन उमंग से लहराता था,
घर घर लड्डू बंटवारा था।
डाकिया के संग सभी अपनों के,
मुंह मीठा करवाता था।
पर सदा नहीं आती थी अच्छी खबरें,
कुछ बुरी खबर भी आती थी।
नहीं रहे फला फला.. ,
पूरे घर में उदासी छा जाती थी।