इश्क़ की बगावत

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इश्क़ की बगावत


एक सवेरे तुझ से नज़रें जो मिली थीं, देखा था तुझे उस वक्त जब धूप खिली थी। जानता था मैं बग़ावत कर रहा हूँ उसूलों से, पर तुझे अपनी आँखों के सामने देखकर, वो बग़ावत की भूल की थी।

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