इश्क़ की बगावत
Added Successfully to library!
इश्क़ की बगावत
दैनिक प्रतियोगिता
शायरी और गज़ल
एक सवेरे तुझ से नज़रें जो मिली थीं, देखा था तुझे उस वक्त जब धूप खिली थी। जानता था मैं बग़ावत कर रहा हूँ उसूलों से, पर तुझे अपनी आँखों के सामने देखकर, वो बग़ावत की भूल की थी।
लेखक : Diamondshine
Add To Library
23
Views
5
Ratings
2 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप