"पढ़ाई का दबाव" एक किशोर सौरभ की कहानी है, जो माता-पिता की उम्मीदों और पढ़ाई के दबाव में घुटन महसूस करता है। हर दिन की कड़ी मेहनत, सख्त अनुशासन और असफलता का डर उसे मानसिक तनाव में डाल देता है। कम नंबर आने पर पिता का गुस्सा और समाज का ताना उसे निराशा में धकेलता है। जब आत्महत्या का ख्याल आता है, तब माँ का प्यार उसे रोक लेता है। अंततः परिवार समझता है कि सफलता से ज़्यादा ज़रूरी मानसिक शांति है।