माटी का खिलौना
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माटी का खिलौना
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
माटी का खिलौना बचपन की गलियों में एक दिन, पापा ने मुझको थमाया था छिन-छिन। अपने हाथों से गढ़ी थी वो मूरत, माटी की खुशबू में थी उनकी सूरत।
: Erica
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