तुम्हारा हमसफ़र होना
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तुम्हारा हमसफ़र होना
दैनिक प्रतियोगिता
शायरी और गज़ल
**तुम्हारा हमसफर होना** तुम हमसफ़र, हमसाया हो मेरा, मेरी गुमनाम ज़िंदगी का नायाब सवेरा। वक्त की जंजीरों से तुम मुझे मिले, कभी नसीब, कभी खुदा बनके आये मेरे।............
लेखक : Diamondshine
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