हमसाया
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हमसाया
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कैसे कहूँ मेरा साया मेरा हमसाया है, साथ इसने भी मेरा कहाँ निभाया है, दिन भर साथ मेरा निभाता है, होते ही अंधेरा यह साथ मेरा छोड़ जाता है, अकेला मुझे कर जाता है,
लेखक : Anju sahu
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