नितीश कटारा मुंडेर केस
मै हु deben ki kahaniya आज मै आपको एक case ले कर आया हु, क्यों की यह case हमें बता ता है? कैसे हम अपनी गलतियों को पर्दा डालने की कोशिश करते है | की पैसा और पावर किस कदर हमारी सोसाइटी में किस कदर जेड जुखा चुकी है, और हमें बर्बाद कर रहा है, यह case सालो साल चला और अपने आप ही अनोखा case है, यह case नै कहीं परिवार को उजड़ा दिया| चलिए चलते कहानी की तरफ..........
यह बात है साल 2002 17 feb सुबहे की वह रात कुछ ज्यादा लंबी हुई थी | यूपी पुलिस की एक टीम नींद एक दम उडी हु ही थी | उनके सामने था एक मुंडेर case up के सिखर पुर रोड खुर्जा मै पुलिस की टीम एक लांस की सिनाक्त कर रही थी | victom की बडी इस कदर जल चुकी थी? की उसे पहचान एक दम ना मुमकिन था | सबकी मनन मै एक सवालों था, किसने इस आदमी को इंसान को इतना बेहरेमी से मारा है की देखो नै बाले की रुहो तक काफो जाहे पुलिस की investing पता चला, विक्टिम नाम था, नितेश कटारा यह नितेश कटारा था कौन?
एक बड़ी ही नार्मल सी फॅमिली नार्मल एंबीशन वाला एक जिंदादिल नितीश कटारा, फॅमिली नितेश के अलाबा उसके पापा एक एक रिटायर आईएएस ऑफिसर थे, मा नीलम कटारा goverment school मै एजुकेशन ऑफिसर काम करती थी | और नितेश का एक छोटा सा भाई भी था |
आखिर कार नितेश को अपनी जान क्यों गवानी पड़ी???
नितीश कटारा का case की सुरुवात होती है | 1998 नितीश नै अपनी ग्रेजुएशन कम्पलीट करने के बाद दिल्ली की पास की गाजियाबाद मै एडमिशन किया, यहाँ पहेली बार उसकी मुलाक़ात हु ही, भारती यादव से उसकी तरह एक कॉंफिडेंट और ज़िंदा दिल थी भारती , नितीश और भारती क्लासमेट थे,
और एक अच्छे दोस्त थे, लेकिन यह दोस्ती बहुत गेहेरी होती चली गयी, और यह दोस्ती धीरे धीरे pyarr❤️❤️ मै भी बदल गयी |
अगर उनके कलेज के दोस्त से माने बो बता तै है की भारती और नितेश मेडली ऑफ़ लव एचदर सच कहते है, ता भाई प्यारर बैकराउंड देखो करो ता किया नहीं जाता, भारती यादव का बैकराउंड नितेश से कंप्लेंटी नितेश से अलग था, भारती उस समय के माफिया डॉन राजनैतिक बाहुबली, यह कहना चाहिए बाहुबली धर्मपाल यादव की बेटी है |
धर्मपाल यादव उनदिन लोग western up का राजा कहते थे | की यह मानिये राजा से कोई ऊपर हो सकता बो थे, डीपी यादव, उनके पास बहुत पैसा पोलिटिकल पावर था | जितना उस टाइम मै किस और नेता के पास नहीं था |
बड़े बड़े पोलिटेशन और बाहुबली डीपी यादवा नाम से तर तर कफ्ते थे | और सोर्सस के मैने भारती के पिता डीपी यादवा बेमिशाल पैसा 2000 के आस पास तक़रीबन 5अरबो रुपए थी.
बो खुद ता 2 बार उत्तर प्रदेश केबिनटे के मंत्री रहे, पर पैसे की दम पर और अपनी पत्नी उंगलेश यादव को ना ता इलेक्शन लड़बाया बल्कि जितबा भी दिया.
फिर सवाल बही के बही है, पोलिटिकल पावर से पैसा कमान हो या पैसे से पोलटिकल पावर हासिल करना हो डीपी यादव दोनों ही जगह पर महारथी थे | पिता बैकराउंड से भारती एक दम अपोजिट थी | और यही बजे थी नितेश कटारा जैसी सिंपल इंसान उसे भारती प्यारर कर बैठी ❤️❤️❤️
बहुत हिमत के बाद भारती नै नितेश के बारे मै अपने फॅमिली को बतया था | घर मै यह रिश्ते के लिया साफ साफ माना कर दिया | भारती की फॅमिली को अपनी जाती के बाहर या इंटेरोकास्ट सख्त थे |
लेकिन घर बाले के माना करने के बाबुजूद भारती और नितेश एक दूसरे की फीलिंग्स एक पाल के लिया कम नहीं हु ही थी,
साल 2000 जब कलेज ख़तम हु हा
तब नितेश नै दिल्ली की ही एक बड़ी सी कंपनी मै बुसिनेस्स स्टार्ट की और भारती अपने घर लोट आयी थी, लेकिन चुप चुप के मुलाकातों फ़ोन पर बात चित का सील सिला अभी भी जारी रहा और 2002 आते आते भारती का लुका छुपी बाला प्यारर इस प्यारर को पुरे 4 साल हो गये थे, उन दोनों का प्यारर अब गेहेरा हो चूका था, और बो दोनों एक दूसरे से सादी करने का मन भी बना लिया था.
और आया बो साल जब सबकुछ बदल गया, उसी साल नितेश और भारती के कॉमन फ्रेंड थी, शिवानी कोर उसने उसकी सादी मै उन दोनों को बुलाया था, नितेश अपने दोस्त के साथ सादी मै पहँचा और भारती, विशाल यादव, विकाश यादव, और बहन भावना यादव साथ मै सादी मै आये थे |
सादी की फेक्शन मै नितेश और भारती की नजदीकिया विशाल और विकाश यादव को बरदास ही नहीं हो रही थी
नितेश को भारती के साथ डांस करना दोनों का एक दूसरे का आँखों मै आंखे डालना, हंस हंस कर बाते करना, यह सारे मंजर देखो करो विकाश और विशाल यादव का खून खुलने लगा था, पिता डीपी यादव बेसुमार सम्पति और पावर रुतबा का यह भी यकीन दिला दिया था विकाश यादव खुद किस राजा से कम नहीं है | क़ानून तोडना और एक गिलास पानी पीना होता है, इनके लिया दोनों चीज़े बराबर ही थी, विकाश यादव के मुताबिक नितेश कटारा धर्मपाल यादव डीपी यादव reputaction के लिया और बड़ा खतरा बन चूका था, और विकाश यादव इस खतरे को किस भी हाल मै मिटाना चाहता था.
सादी बाले दिन,
16 feb 2002 को रात को ताकरीबन 12:30 बजे ऐसे कहते है, सिक्योरिटी गार्ड नै विकाश यादव, विशाल यादव, और नितेश कटारा को एक टाट सफारी कार मै जाते हु है देखा और उनके साथ और एक सकस महुजूद था, इस सकस का नाम सुखदेव पहलबान और आगे जाने एक सुनसान जगह पर गाड़ी रुक दिया गया, akhela निहोता नितेश कटारा को उन 3 लोग के सामने कुछ नहीं कर पा रहा था, विकाश यादव अपने गाड़ी के तरफ बड़ा वहां से एक हाथड़ा निकाला और वो होथोड़ा एक दम जोर से नितेश कटारा के सीर पर दे मारा नितेश कटारा करा उठा इसके बाद भी उसका मनन नहीं शांत हु हा था, गाड़ी से पेट्रोल निकाला गया और देखते ही देखते नितेश कटारा के ऊपर पेट्रोल छिड़क करो आग लगा दी गयी, एक बेगुनाह इंसान ना जाने कितना जखम साया होगा, नितेश कटारा नै ना जाने कितने चीखे और यह चीखे तब रहे गयी विशाल यादव और विकाश यादव का पैसा पावर का घमंड मै
अगले दिन 17 feb को पुलिस को नितेश की लांस मिली |
28 feb को बडी का पोसमेटम हु हा, 29 feb को नितेश की मा को आइडेंटिफिकेतीन के लिया बुलया गया, नितेश की बडी पहले ही जल चुकी थी, और उसकी पहचान ही मुश्किल था | बोलते ही की पुलिस को बडी के पास एक घड़ी मिली थी |
नितेश की मा नीलम कटारा कन्फर्म किया यह उनके बेटे नितेश कटारा का है | इन हालत मै genrally देखा गया है की लोग अपने होस खो बैठे है, लेकिन नीलम कटारा अंदर से इतना ही मुजबात थी |
पुलिस इंस्पेक्टर अशोक भरदिया नै 23 अप्रैल 2002 को विकाश और विशाल यादव को mp के घबारा सेहर से गिरफ्तार किया, अपनी ओरिजिनल स्टेटमेंट मै इनसेप्तार भड़रिया नै कहा था, विशाल और विकाश नै ही नितीश कटारा को मुंडेर किया है, और कन्फसे भी किया है, फिर बाद मै कोनसी ऐसी हवा चली हवा प्लेटने के साथ ही इंस्पेक्टर भड़रिया अपनी दी हु ही स्टेटमेंट से पलट गये | डीपी यादव की पावर अब खेलो दिखा रही थी.
पर नीलम कटारा इतना कुछ खो चुकी थी, और अब खोने के लिया और कुछ बाकि नहीं था | उन्हें नै हार नहीं मानी 23 अगस्त 2002 को नीलम कटारा नै सुप्रीम कोर्ट मै एक औपली की और नितीश कटारा का केस गाज़ीबाद से दिल्ली के कोर्ट पर ट्रांसफर करदिया गया |
अब डीपी यादव का उठ अब पहाड़ पर आओ रहा था, up का राजा जो की सिटम को नचा रहा था, लगता है अब उसका नाचने की बारे आओ गयी थी |
कुछ ही महीने मै दिल्ली की ट्रायल कोर्ट 23 Nov 2002 को
यादव भाइये और सुखदेव पहलबान को चार्जेस लगा गये कोर्ट नै 7 अप्रैल 2002 को भारती यादव को कोर्ट मै पेसो होने का लेटर भेजा लेकिन यहाँ पर भी डीपी यादव 10 कदम आगे थे, उन्हें नै पहले से ही लंदन भेजो दिया था, वक़्त बिता गया लेकिन नितीश को इंसाफ नहीं मिला था, मगर नीलम कटारा का हिम्मत पहले से ज्यादा और 100 गुना बढ़ गयी थी | बो लगा तार अपफील करती रही, और कोर्ट नै भारती का पासपोर्ट कैंसल करदिया | यह एक मा की बहुत बड़ी जीत थी |
भारती यादव हिंदुस्तान लूटना पड़ा और कोर्ट मै स्टेटमेंट देना पड़ा, भारती नै एक महिला पुलिस को बतया था नितीश के मरने पर उसको बहुत ओफ्फ्सस है, उसने यह भी कहा था, उसके पिता डीपी यादव को उसके साथ रिश्ता बिलकुल पसंद नहीं था | उसने कोर्ट मै साफ साफ इनकार करदिया की उसके और नितीश और मेरे बिच मै कोई भी रिश्ता नहीं है, था उसने कहा नितीश और एक अच्छे दोस्त थे, नीलम कटारा यह सुनो करो डंग रहे गयी, उन्हें नै कभी नहीं सोचा था की जिस लड़की से प्यारर करने की बजसे उनके बेटे की जान गयी आज बो लड़की उसके हत्या रा को बचाने के लिया इस हद के जाहेगी | डीपी यादव के ख़रीदे हु है बकील नै अच्छे से तैयार किया था, भारती को शयद डीपी यादव नै पैसे से भारती की प्यारर को भी खरीद लिया था |
लेकिन बो कहते है ना सत्यमेव जयते..।........
सच की जरुरत होती है, हिम्मत की जो की नीलम कटारा मै भरपूर थी, अजय कुमार बो इंसान जिन्हे नै उसे रात नितीश को विकाश, विशाल, सुकदेव के साथ गाढ़ी मै देखा था, उनकी गाबाही ही नै केस को स्ट्रांगे रखा |
फिर बो दिन आया दिल्ली ट्रायल कोर्ट नै 28 may 2007 को विकाश और विशाल यादव को किडनैपिंग मुंडेर के लिया दोषी माना उन्हें उम्रकेतो की सजा सुना ही नितीश 3 दोषी सुखदेव पहलबान अप्रैल 2011 मै दिल्ली कोर्ट नै उम्रकेदे की सजा सुना ही यह 3 को 25 साल की सजा हु ही |
यह कहानी एक मा की थी, जो अपने बेटा की इंसाफ दिला नै के लिया, पुर सिस्टम से लड़ गयी यह जीत नीलम कटारा की नहीं यह जीत क़ानून की भी है, दोसी कितने भी कोशिश करले क़ानून का सिकंजा कभी ना कभी उसे घेरो लेता, यह केस कितना दुखत हो इसका अंत सुखत रहा |
Yeh ek real base story hai