हमसाया
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हमसाया
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
हमसाया आरज़ू है बस इतनी सी, कोई हो मेरे करीब इतना। उसके मेरे दरमियां ना हो कोई फासला। हम साया बन के वो मेरा, रहे हर पल हर कदम साथ मेरे। आ
: निर्मेश
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