हमसाया
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हमसाया
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तू हमसाया है मेरे, पर क्या तूने ये जाना? मैंने तेरा दुख भी ओढ़ा, तेरा सुख भी पहचाना। तेरी साँसों की सरगम में, मेरी धड़कन बजती रही, तेरे हर आँसू के नीचे, मेरी पलकों की नमी रही।
: Aastha
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