जोश
यह कविता हार से हार न मानने की कहानी कहती है। हर ठोकर को सबक बनाकर, हर अंधेरे में रोशनी जलाकर, यह जीवन की राहों में आगे बढ़ने का हौसला देती है। तूफानों से टकराकर, मुश्किलों से जूझकर, जोश कभी कम नहीं होता—बल्कि हर दर्द उसे और मजबूत बनाता है।
यह सिर्फ एक वादा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की लौ है, जो गिरने के बाद भी जलती रहती है। हर हार के आगे रास्ता बनाने का संकल्प, और हर अगली सुबह को जीत का त्यौहार बनाने का जुनून—यही इस कविता का असली संदेश है।