इजहारे इश्क
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इजहारे इश्क
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
आँखों में जो ख्वाब सजे, मैं उन ख्वाबों का जिक्र करूँ, तेरी ज़ुल्फ़ों की छाँव में बैठ, तेरी बातों का इश्क करूँ।
: Aastha
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