गुलाब (इजहार प्रेम का)
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गुलाब (इजहार प्रेम का)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
गुलाब का शबाब भी होता अजीब, दो अनजान लोगों को भी कर देता है करीब। जब करना हो इजहारे इश्क तो, याद आता है गुलाब। जब मनाना हो रूठे दिलवर को तो, याद आता है गुलाब। जब शृंगार लगे अधूरा, सोचे करें कैसे उसको पूरा।
: निर्मेश
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