गुलाब ( इजहार प्रेम का)
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गुलाब ( इजहार प्रेम का)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जिन्दगी कुछ यूँ उलझ कर रह गई, जैसे काँटों के बीच उलझे हो गुलाब।
: Hemlata sahu
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