इंतजार
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इंतजार
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तू आएगा, ये सोच के हर शाम गुज़ारते हैं, दिल के कोने में तेरा एहसास संवारते हैं। सूरज ढलता है, फिर उग जाता है, पर तेरा इंतज़ार हर पल साथ निभाता है।
: Aastha
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