इंतजार
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इंतजार
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
दर्द से भरी सर्द की रात , खुद को जगाए रखा , दिल ही दिल में ये बात दबाए रखा , था यकीन खुद पर खुद से भी ज्यादा , मैने ओस की बूंदों की तरह तुम्हारा इंतजार किया ,
: Mahima
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