तन्हाई ( स्वैच्छिक )
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तन्हाई ( स्वैच्छिक )
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
पता नहीं क्यों आजकल खुद को बहुत अकेला महसूस करती हूं , ऐसा नहीं है की मेरे आसपास भीड़ नही होती हैं , फिर भी खुद को तन्हा महसूस करती हूं , अपनों के बीच होकर भी खुद को पराया करती हूं , सैकड़ों भीड़ होने के बाद भी ,
: Mahima
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