सर्दियों ने दस्तक दे दी थी और पंकज राणा तो जैसे सर्दियों का ही दीवाना था।
उन कच्ची बस्तियों के पास खड़ी उस नीलम हवेली के सामने की कच्ची सड़क पर अचानक से पंकज ने अपनी बाइक के ब्रेक लगा दिए और नम आंखों से उस हवेली की और देखने लगा।
तीन मंजिला उस हवेली में ना जाने कितने राज दफन थे।
किसी के पास इनका कोई जवाब ना था।