"बोलती आँखें" एक भावनात्मक कविता है जो आँखों की अनकही भाषा को खूबसूरती से व्यक्त करती है। यह आँखों के माध्यम से प्रेम, पीड़ा, खुशियाँ और सपनों की दुनिया को उजागर करती है। कभी ये मासूमियत का आईना बनती हैं, तो कभी दर्द की गहराइयों को समेटे रहती हैं। यह कविता उन निगाहों की कहानी कहती है, जो बिना शब्दों के भी हर जज़्बात को बयां कर जाती हैं।