आशीर्वाद
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आशीर्वाद
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जब बात लगे बिगड़ने, जब मन लगे घबराने। तब इस व्याकुल मन को, किसी शीतल छांव की होती है दरकार, अपनों के आशीर्वाद भरे हाथ के सर पर अपने रखने का होता है इंतजार।
लेखक : निर्मेश
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