चांदनी रात
Added Successfully to library!
चांदनी रात
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
चांदनी बिखरी धरा पर, चुपके से मुस्कुराए, शीतल किरणें गगन से, धरती को सहलाए। नदियों के जल में छनकर, मोती-सी झिलमिलाए, शाखों पर छनती रोशनी, सपनों को बहलाए।
: Aastha
Add To Library
16
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप