कर्म
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कर्म
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
घर से निकलने के बाद खुद को अकेला पाया है भीतर से एक आवाज आई , क्या करना है अब दिल ने कहा, तू कर कर्म फल का चिंता मत कर ।
लेखक : Saraswati
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