मेरा गुस्सा...
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मेरा गुस्सा...
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
गुस्सा हम सब को आता है कभी ज्यादा कभी कम ... मैंने अपने गुस्से से एक ही बात सीखी है कि इसको उतना ही खुद पर हावी होने दिया जाए जितने से हम किसी और को आहत न करे .. in the end विवेक को हमारा गुस्सा न खा जाए..☺️
लेखक : ☀️ sun 😎 sine
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