"क्या हुआ, यार? तू आजकल इतना चुप क्यों रहता है?"
समीर ने गहरी सांस लेते हुए कहा,
खुद की कहानी लिखकर एक पन्ना छोड़ आया हूं,
जो मेरा दिल का टुकड़ा था, उसे कुर्बान कर आया हूं।
जिसके बिना अधूरी थी मेरी जिंदगी की किताब,
आज उसी को अलविदा कहकर आया हूं।
🥺🥺🥺
अधीर ने उसे के काधे पर हाथ रख कर कहा " यार तुझे क्या हुआ तु ये शयारी का से बोलने लगा।
"आभा से बात नहीं हो रही। वह मुझसे दूर हो गई है। मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं।"