परिवर्तन

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जब भी परिवर्तन की खातिर कोई अलख जगाता है। घोर घने अंधियारे में जब कोई दीप जलाता है मंजधारे में डूबती नैया जब कोई पार लगाता है तब अदना सा वो इंसान मसीहा बन जाता है

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