" पिंजरे की कैद "

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" पिंजरे की कैद "


" पिंजरे की कैद " कविता उस पीड़ा और तड़पन को बयां करती है जो मनुष्य हो या पंछी दोनों जब किसी पर विश्वास कर अपने एक गलत निर्णय की वजह से खुदको कैद करवा जातें हैं। #प्रतियोगिता हेतु

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