दीदार : एक माँ और पत्नी का इंतज़ार
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दीदार : एक माँ और पत्नी का इंतज़ार
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
आ लौट आ, ऐ लाल मेरे, तेरी माँ ने थाम रखा आस। पत्नी की सूनी आँखों में, तेरी चाहत का है विश्वास। तेरा दीदार हो इक पल को, बस इतना ही अरमान है। तेरी सलामती की दुआ में, हर धड़कन कुर्बान है।
: Erica
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