तुम सुन सको तो सुनो मेरी व्यथा
मैं जीवन की जरजर काया में हूँ
मोह माया कि अभिलाषा नहीं अब
कयोंकि मैं अपने अंतिम पड़ाव में हूँ
जीवन व्यतीत किया मैनें सारा
सारे सुख दुःख मेरे साथी है,
मैं निर्दोष, निश्छल माया में हूँ
क्योंकि सब पाप-पुण्य से बाहर
निकल आया हूँ मैं🙏
शान्त हो गया है अब चित्त मेरा
सब अपनों के पास हूँ मैं...
नहीं किसी से बैर-बुराई, कयोंकि
मेरे अंतिम सफर का एक मैं ही साथी।
अंतिम पड़ाव पर हूँ मैं अब🙏🙏....