"ना जान ना पहचान फिर भी तकदीर उन्हें मिलाएगी वो बनेगी किसी का जुनून पर उनकी इश्क मुकम्मल ना हो पाएगी।” सूर्या सिंह राठौर एक एरोगेंट, जलता आग है, जिसके आगे किसी मजबूर की कीमत पत्ते के बराबर है, जिसे वो अपने पैरो तले रोडना जनता है जो औरत को एक खिलौना और पैसे के लिए बिक जाने वाली चीज समझता है, जिसकी वजह उसके राजवंशी खानदान है ,जिसके मर्यादा के लिए उसने अपने ही प्यार जैस्मिन को मार दिया। राजवंशी खानदान जिसके अंदर कोई लड़की हो या दुल्हन आना मना है। दूसरी तरफ है राहत एक नरम दिल, औरतों के हक के लिए लड़ने वाले अपने प्यार के इंतजार में जैसे ही वो अपने प्यार से शादी के मंडप में उससे मिलती है, तभी सूर्या सारी मर्यादा तोड़ राहत को उस मंडप से अपने उठा के साथ ले जाता है, राहत जो पहली ही मुलाकात में ही वो बन गई सूर्या की जुनून जिसे वो हासिल करने के लिए गुजरा हर हद से तो राहत का सूर्या से क्या रिश्ता है? क्यों सूर्या ने अपने ही प्यार को मार दिया? क्यों उसके घर किसी औरत और एक दुल्हन को जाना मना है, इतने बंधन के बाद क्या सूर्या जैसे आग को क्या राहत मिलेगी?