अनंत की तलाश
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अनंत की तलाश
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
चल पड़ा है तू जो बंदे प्रकाश की तलाश में तू कहीं न खो जाए कि आनंद की तलाश में । अंतहीन राह है कामना अपार है, विलासिता की चाह है स्वार्थ बेहिसाब है। स्वयं की ही बात हो चाहे कोई न साथ हो, चल पड़ा है तू जो बंदे प्रकाश की तलाश में।
: निर्मेश
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