स्वैच्छिक: औरत की पहचान
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स्वैच्छिक: औरत की पहचान
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
हे नारी... जब दिल कहे, वही करना है, बिना डर के आगे बढ़ना है। दुनिया जो भी कहे, कहने दो, हमें तो बस अपना सच कहना है।
लेखक : Erica
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