अंधेरा...
घने जंगल के बीच एक प्राचीन गुफा। अंदर सिर्फ एक मशाल की हल्की रोशनी। अद्विक राणा तेज सांसें लेते हुए आगे बढ़ता है। उसके हाथों से हल्की-हल्की लपटें निकल रही हैं।
"ये खतरा अब हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा, अनन्या। अगर हम रुके, तो कालेश्वर वो पा लेगा जो उसे नहीं मिलना चाहिए।"
गुफा के अंदर से एक गूंजती हुई आवाज आती है।
कालेश्वर:
"अद्विक, अनन्या... क्या तुम सोचते हो कि तुम मुझे रोक पाओगे? मैं इस शक्ति ग्रंथ का स्वामी बनने वाला हूं। तुम्हारी कोशिशें व्यर्थ हैं!"
अचानक, गुफा की दीवारें कांपने लगती हैं। अद्विक अपने हाथों से एक आग की ढाल बनाता है।
गुफा के अंदर से कालेश्वर प्रकट होता है। उसकी आंखें चमक रही हैं, और उसके हाथों में अजीब सी काली ऊर्जा लहरा रही है।
"तुम्हारी शक्तियां मेरे सामने कुछ भी नहीं हैं। अब समय है तुम्हें खत्म करने का!"
अद्विक, अनन्या और आरुषि एक साथ खड़े होते हैं। अद्विक की आग, अनन्या की भविष्य दृष्टि, और आरुषि का जल मिलकर कालेश्वर के खिलाफ एक नई शक्ति का निर्माण करते हैं
"तूने सोचा होगा कि तू हमें तोड़ देगा, लेकिन तूने हमें और मजबूत बना दिया है। अब देख, सच्ची शक्ति क्या होती है!"
गुफा में एक जोरदार विस्फोट होता है। रोशनी और अंधकार के बीच, कहानी की असली लड़ाई शुरू होती है।
"शक्ति तो हर किसी के पास होती है, पर सही और गलत का चुनाव ही असली ताकत है।"
"Mastes of the elements" जल्द आ रहा है...