कमियां
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कमियां
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कमियां हैं, तो क्या हुआ, हर गम ने हमें रास्ता दिखाया। जो टूटा, वो संभल गया, जो गिरा, वो खुद चल पड़ा। हर कमी एक सवाल लिए आती है, जवाब में नई रोशनी लाती है। दर्द का हर कतरा, कहानी बन जाता, जो जुनून को और भी चमका जाता।
: Erica
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