यह छोटी सी पोटली, जीवन की कहानी है,
हर छुपा राज़, हर छुपी वफ़ा की निशानी है।
जिसे बांधते हैं हम अपने सुख-दुःख के पल,
यादों का भार और सपनों का हल।
इसमें बसी है माँ की साड़ी की महक,
बचपन की खुशबू, और किसी पुराने गीत की झंकार।
कभी ताजगी में बसी हर मुहब्बत की दुआ,
कभी आंसुओं की भीगी रेखाएँ, जिसे हम छोड़ नहीं पाते।
यह पोटली एक वादा है,
सपनों को संभालने का, हर उम्मीद को वापस लाने का।
कभी अनकही हसरतें, कभी बिछड़े रिश्तों की बात,
हर सर्दी-गर्मी की धड़कनें, फिर भी इसे खोलते जाते हैं हम रातों के साथ।
पोटली में बसी होती है कहानी की ध्वनि,
कभी चुप, कभी गूंजती रहती है इंद्रधनुषी धारा।
इसी में लुकी रहती है धूप, और रातों की ठंडी हवा,
जिसमें बसी है वक्त की अपनी माया।
जब भी खोलो, कुछ न कुछ पुराना मिलेगा,
कभी खुशी का एक लम्हा, कभी कोई टूटता सपना।
यह पोटली हमें बताती है,
जितना खोला जाए, उतना ही कुछ नया मिलता है।
यह पोटली जीवन की सादगी और संघर्ष का प्रतीक है,
यह हमारी पहचान, हमारी यादों का सबसे प्यारा रचनाकार है।
हर सिला हुआ कपड़ा, हर टुकड़ा और एक पुरानी किताब,
इनमें बसी होती है समय की वो मिसरी, जिसे हम कभी न छोड़ पाए।
यह पोटली, नये रास्तों की ओर बढ़ते जाने का साहस,
नये सफर, नये एहसास और कुछ अजनबी उंगलियों का राज़।
हर अनुभव, हर गलती और हर बार टूटे भरोसे को इसमें समेट कर,
हम फिर से नए जोश से आगे बढ़ते हैं, अपनी पोटली में ढूंढते हैं नई राह।