ब्रेकअप
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ब्रेकअप
कविता
कविता
बैकअप पैचअप का खेल निराला, करता है ये अब ये जग सारा। सोलह की उम्र के पेटे में ही, हो जाता जाता है इनको प्यार। प्यार का नशा चढ़ने पर, बाबू शोना शोना बाबू, दिन रात बस यही रहता है यही जुबान पर।
लेखक : निर्मेश
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