🌃रात 🌃
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🌃रात 🌃
गजल
शायरी और गज़ल
एक दिन रात में मैं पढ़ने के उद्देश्य से कमरे में टेबल पर बैठ कर किताब हाथ में ली कि तभी अचानक लाइट चली गई, तब क्योंकि समय रात के 12 बजे से भी ऊपर हो चुके थे सो तब मुझे डर लगने लगा और इसी डर ने ये कविता रच ली —
लेखक : Trivesh
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