तुमसे प्यारा कोई ओर नहीं... ( स्वैच्%
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तुमसे प्यारा कोई ओर नहीं... ( स्वैच्%
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तुमसे प्यारा कोई नही, मन में किसी का ठौर नहीं। चंचल अंखियां, मुस्काते होंठ, याद आती है तेरी रोज, बहियां फैलाएगा आएगा, हंस कर गले लग जायेगा, जिस दिन तू आयेगा, घर का हर कोना मुस्कायेगा।
लेखक : निर्मेश
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