कविता "फिसलता वक्त" समय की अस्थिरता और इसके जीवन पर गहरे प्रभाव को दर्शाती है। समय को एक अनियंत्रित और अदृश्य शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो रेत, प्रकाश, या बहते पानी की तरह हाथों से फिसल जाता है। यह जीवन के क्षणभंगुरता की सुंदरता और गहराई को उजागर करती है, जिसमें हर पल अनगिनत भावनाएँ, सपने और सबक छिपे होते हैं। कविता हमें वर्तमान को जीने, जीवन के हर क्षण को संजोने और समय की धारा में छिपे अर्थ को समझने का संदेश देती है। समय को एक गुरु और मूक साक्षी के रूप में देखा गया है, जो हमें जीवन का सही सार सिखाता है।