फिसलता वक्त
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फिसलता वक्त
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
वक्त रेत की तरह है फिसलता जरूर है, धैर्य से चलो क्योंकि समय बदलता जरूर है'वक़्त फिसलता जा रहा है,
: Pandey
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