फिसलता वक्त
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फिसलता वक्त
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
वक्त ओ जो जो चला जाता है ओ नही मिल पाता जो हाथ से गया मानो ओ कभी भी नहीं मिल पायेगा तो वक्त की कलर करो ......
लेखक : Bhawani dive
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