"अनोखा अतिथि" एक रहस्यमय कहानी है, जो मोहनलाल और उसके परिवार के जीवन में अचानक आए एक अजनबी अतिथि वरुण के माध्यम से unfolds होती है। वरुण, जो एक लेखक है, अपने शोध के लिए गाँव आता है और जल्द ही गाँव के आसपास के जंगलों में गहरे रहस्यों को खोजने लगता है। जैसे-जैसे घटनाएँ आगे बढ़ती हैं, वरुण और गोपाल (मोहनलाल का बेटा) एक प्राचीन मंदिर की ओर रुख करते हैं, जहां एक खतरनाक शक्ति छिपी हुई है। यह शक्ति गाँव और आसपास के क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है। गोपाल और वरुण मिलकर इस शक्ति से लड़ते हैं, और कहानी हमें बताती है कि साहस, मित्रता और समर्पण से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती।