भाग्य का खेल - एक आत्मा की पुकार

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भाग्य का खेल - एक आत्मा की पुकार


" तुम एक आत्मा हो..!" "मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि ये मेरे साथ हो रहा है!" आदु चिल्लाया,  उसकी आंखें हैरानी से फैली हुई थीं। सामने खडे शख्स को देखकर वो बुरी तरह चौंक गया था। तभी सामने से फिर वही आवाज सुनाई दी।‌ "विश्वास कीजिए, मैं भी आपकी तरह ही चौंक गया हूं," अद्भुत ने जवाब दिया , उसकी आवाज़ थोड़ी इमोशनल थी।‌ "आदु, मन ही मन में खुद से बोला मैं कहां इस स्थिति में  फंस गया?" उसने सामनी खड़ी परछाई को डेहरी नजरों से देखा और अपने बालों में हाथ फेरा।  और अपनी बात जारी रखते हुए बोला... में कैसे ट्रस्ट करु की तुम सच में भूत हो,  "ये एक लंबी कहानी है, जिसे मैं खुद पूरी तरह से समझ नहीं पाया हूं," अद्भुत ने बड़ी शांती से कहा । "अच्छा, हमें इसका पता लगाना होगा, क्योंकि मैं तेरे शरीर में सदा-सर्वदा नहीं रह सकता!" अदभुत ने कहां ,  उसके हाथ तेज़ी से हिल रहे थे।
लेखक : Sonu

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