यह कहानी श्रेया और अर्जुन की अधूरी लेकिन सच्ची प्रेम कहानी है, जो वर्षों के बाद अपने मुकाम तक पहुंचती है। श्रेया की डायरी उसकी भावनाओं और अर्जुन के साथ बिताए पलों की गवाह थी। हालात ने दोनों को अलग कर दिया, लेकिन उनकी भावनाएं कभी खत्म नहीं हुईं। सालों बाद, जब दोनों ने फिर से एक-दूसरे से संपर्क किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि उनका प्यार अब भी जीवित है। दोनों ने अपने बीते हुए कल को पीछे छोड़ते हुए नए सिरे से अपनी कहानी लिखी। यह कहानी साबित करती है कि सच्चा प्यार परिस्थितियों से परे होता है और समय के साथ कभी समाप्त नहीं होता।
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