सौंदर्य रंग-रूप से परे, यह आत्मा की गहराई में बसता है। इसे देखने के लिए सच्ची और पवित्र दृष्टि चाहिए। लालच और हवस से भरी नजरें इसे नहीं समझ पातीं। असली सौंदर्य वह है, जो गरिमा और स्नेह से परिभाषित होता है, जो हर व्यक्ति में समान रूप से बसा होता है।
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