हर उलझन, हर दर्द, हर भय, मेरे भीतर ही एक सूरत बनाता है, जो पहचानता है अपने अंदर, वही जीवन का सच्चा अर्थ पाता है।
1. आत्मबोध 16 | 12 | 14 | 5 | | 28-12-2024 |
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