इस नॉवेल की कहानी रक्षित अग्रवाल के गुनाहों के इर्द-गिर्द घूमती है। दुनिया की नजर में हो एक बहुत ही अच्छा फिल्मी कलाकार और एक अच्छा पॉलिटिशियन भी था। असल जिंदगी में उसका उठना बैठना गैंगस्टर के साथ था। उसका असली धंधा तो कुछ और ही था। जो भी उसके धंधे को दुनिया के सामने लेकर आने की कोशिश करता या उसके धंधे को थोड़ा भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता तो वह उन्हें मार देता था। और यह कहानी भी उन लोगों से ही शुरू होती है। जो जाने और अनजाने में ही सही पर उसके धंधे को नुकसान पहुंचा रहे थे। आर्य और समीरा दोनो पिछले पांच सालों से एक दूसरे से बहुत प्यार करते आ रहे है। परंतु एक दिन न्यूज में दिखाए जाता है कि आर्य जिस लड़की प्यार करता था। उसी लड़की के साथ दुष्कर्म कर के उसको जलाकर मार दिया गया, और आर्य ने उस अपराध को कोर्ट के सामने मान लिया कि उसी ने ये सब किया। आर्य की दोस्त सिमरन को इसके पीछे किसी की साजिश लगती है, इसीलिए उसने न्यूज़ रिपोर्टर विजय की मदद ली। उसी समय विजय को एक आया, जिसे सुनने के बाद दोनों का नज़रिया इस केस को लेकर बदल गया। आखिर रक्षित अग्रवाल, समीरा और आर्य के बीच क्या रिश्ता? क्या सच में आर्य ने ले ली अपने प्यार की जान?
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