अन्त नहीं आरंभ है ये

सोचती हूँ कि आँखें बंद करने से पहले क्यों न अपने अतीत के कुछ पन्ने पलटकर देख लूँ और फिर वैसे भी न जाने ये मौका दोबारा अगले कितने जन्म लेने के बाद ही नसीब हो। देखो सोचा नहीं कि बस सबकुछ नाचने सा लगा मेरी आँखों के सामने ।

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: Writer Dev
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