भाग्य

यह कविता भाग्य और कर्म के बीच के संबंध को दर्शाती है। इसमें बताया गया है कि भाग्य केवल हाथ की रेखाओं में नहीं, बल्कि मेहनत और संघर्ष में छिपा होता है। सफलता के लिए सपनों को थामे रखना और निरंतर प्रयास करना जरूरी है। कर्म की रोशनी से भाग्य खुद-ब-खुद संवर जाता है।

16 Views
Time : 1 Min

All Right Reserved

: Anu
img