अक्स

यह कविता आत्मचिंतन और आत्मा के गहरे सच को समझने का आह्वान करती है। आईने के प्रतीक के माध्यम से यह हमारी पहचान, यादें, और अनुभवों का विश्लेषण करती है। हर पंक्ति में अक्स के बहाने खुद से सवाल करने और अपने भीतर छुपे सच को स्वीकारने की प्रेरणा है। कविता हमें सिखाती है कि हमारा असली स्वरूप वह है, जिसे हम अक्सर खुद से छुपा लेते हैं। यह आत्ममंथन की यात्रा और खुद को अपनाने की प्रक्रिया को गहराई से प्रस्तुत करती है।

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लेखक : विजय सांगा
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